हाइड्रोकार्बन क्या है धातु एवं अधातु के भौतिक गुणों में तीन अन्तर

हाइड्रोकार्बन क्या है? दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर- हाइड्रोकार्बनर्बन कार्बन एवं हाइड्रोजन से मिलकर बने हैं। हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। इनको प्रथम तीन श्रेणियों में बांटा गया है-

1. एल्केन
2. एल्कीन
C. H.. C. H Call

प्रश्न 8. सूर्य अन्य तारों की तुलना में अधिक चमकदार एवं

बड़ा क्यों दिखाई देता है?
2
3. एल्काइन
सामान्य सूत्र
उत्तर-सूर्य पृथ्वी के अधिक निकट होने के कारण अधिक चमकदार एवं बड़ा दिखाई देता है।
अथवा

कोरोना पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय स्पष्ट दिखाई देता है?

उत्तर-पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय प्रकाश मण्डल से आने वाला तीव्र प्रकाश चन्द्रमा से रुक जाता है, तब कोरोना पर्त स्पष्ट एवं चमकदार दिखाई देने लगती है।

लघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 9. धातु एवं अधातु के भौतिक गुणों में तीन अन्तर

3 उत्तर- धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक गुणों में अन्तर-
लिखिए।
क्र.
1.
धातुएँ तन्य तथा आघातवर्ध्य होती है।
ये प्रायः भंगुर होती हैं।
2.
होती है। धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं, परन्तु बिस्मथ
3.
धातुएँ प्रायः चमकदार होती हैं। अधातुओं में धात्विक चमक नहीं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती, परन्तु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद है। ग्रेफाइट और कार्बन गैस को छेड़कर सभी अधातुएँ कुचालक है।
इसका अपवाद है।
अथवा

टाइटेनियम को रणनीतिक धातु क्यों कहते हैं?

उत्तर- टाइटेनियम कठोर, उच्च गलनांक वाली, ऊष्मा तथा विद्युत् को सुचालक धातु है। यह स्टील से हल्की एवं अधिक संक्षारण प्रतिरोधी होती है। इसका उपयोग जैट, गैस टर्बाइन, वायुयान एवं समुद्री जहाज आदि के उपकरण बनाने में तथा रासायनिक संयन्त्र बनाने में किया जाता है।
अतः टाइटेनियम गुण एवं उपयोग में अनोखी होने के कारण महत्वपूर्ण धातु कहलाती है, चूंकि इसका उपयोग युद्ध क्षेत्र के उपकरण, टैंक, तोप, बन्दूक आदि बनाने में किया जाता है, इसलिए यह रणनीतिक धातु भी कहलाती है।
विधि का वर्णन कीजिए।
3 उत्तर- चुम्बकीय प्रकृति के अयस्कों; जैसे हैमेटाइट आदि का सान्द्रण विद्युत् चुम्बकीय पृथक्करण विधि से किया जाता है। इस विधि में
अयस्क का चूर्ण
चुम्बकीय रोलर-
अशुद्धियाँ.
चमड़े की बेल्ट
‘चुम्बकीय अयस्क
चित्र-विद्युत् चुम्बकीय पृथक्करण विधि
एक चमड़े की बेल्ट दो रोलरों पर चलती है जिनमें एक विद्युत् चुम्बक होता है। पिसे हुए अयस्क को इस बेल्ट पर चलाया जाता है जिससे चुम्बकीय प्रकृति का अयस्क रोलर के पास गिरता है तथा अचुम्बकीय अशुद्धियाँ रोलर से दूर गिरती हैं।
अथवा
हाइड्रोकार्बन  धातुहाइड्रोकार्बन  धातु
अमोनिया निर्माण की हैवर विधि में प्रयुक्त अभिक्रिया के पद व समीकरण लिखिए।
उत्तर- अभिक्रिया के पद- इस विधि में नाइट्रोजन एवं
हाइड्रोजन गैसों को 1 3 के अनुपात में परस्पर मिलाकर मिश्रण को शोधक स्तम्भ में भेजा जाता है जहाँ इन गैसों से अशुद्धियाँ पृथक् कर ली जाती हैं। फिर इन गैसों को उच्च दाब पर उत्प्रेरक कक्ष में पम्प कर दिया जाता है। इस मिश्रण को 200 से 300 वायुमण्डलीय दाब पर सम्पीडित कर 450°C से 500°C ताप पर गर्म करके उत्प्रेरक लोहा तथा मोलिब्डेनम की उपस्थिति में अभिक्रिया करायी जाती है। इससे अमोनिया का निर्माण हो जाता है।
अभिक्रिया का समीकरण-
N₂+3H,
(Fe + Mo) A
450°C-500°C 2NH, 1 200 – 300 वायुमण्डलीय दाब
प्रश्न 11. औषधीय पौधे किसे कहते हैं? निम्न औषधीय पौधों के उपयोग लिखिए-
(i) नीम
(ii) अनार (iii) तुलसी
3
उत्तर- औषधीय पौधे-वे पौधे जिनका कोई भी भाग औषधि के रूप में प्रयुक्त होता है, औषधीय पौधे कहलाते हैं।
(i) नीम— इसके सभी भाग औषधीय महत्व के हैं। इसके तेल का उपयोग चर्म रोगों, गठिया एवं कीटनाशक के रूप में किया जाता है।
(1) अनार के रस से खून में लौह तत्व की पू जाती है प का उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है फासंबंधी विकारों को दूर करने के लिए होता है (II) इसकी पत्तियाँ आमाशीय रोग, खांसी, ज सुगंधी को दर्द त्वचा रोगों को दूर करने के लिये उपयोगी है।
अथवा
प्रदूषण क्या है?
प्रदूषण के विभिन्न प्रकार लिखिए।
उत्तर- प्रदूषण” वायु, जल एवं भूमि में अनावश्यक
हानिकारक पदार्थों का एकत्रित होना प्रदूषण कहलाता है।” प्रदूषण के प्रकार
(1) भौतिक, रासायनिक एवं जैविक लक्षणों में वांछित परिवर्तन जो कि मनुष्य एवं जीवमण्डल पर हानिकारक प्रभाव डालता है, वायु प्रदूषण कहलाता है।”
(2) जल प्रदूषण” जल के भौतिक, रासायनिक एवं में अति परिवर्तन जो कि मनुष्य एवं जीव जग पर हानिकारक प्रभाव डालता है, जल प्रदूषण कहलाता है।”
D) प्रदूषण” दा में अवांछित हानिकारक पदार्थों का एकत्रित होना मृदा प्रदूषण कहलाता है।”
(4) ध्वनि प्रदूषण” विभिन्न प्रकार की अवांछित तीव्र ध्वनियों द्वारा पर्यावरण में उत्पन्न शोरगुल एवं अशान्ति ध्वनि प्रदूषण कहलाती है।”
प्रश्न 12. ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ लिखिए।
3
वार्मिंग विभिन्न कारणों से पृथ्वी लगातार गरम उत्तर- ग्लोबल हो रही है जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। वायुमण्डल में CO. CH, एवं NO ग्लोबल वॉर्निंग के लिए उत्तरदायी गैसें गर्मी प्रदान करने वाले सौर विकिरणों को वायुमण्डल में आने तो देती है लेकिन बाहर नहीं जाने देती होती है। इस ग्लोबल वार्मिंग को पर्यावरण इसलिए माना गया है क्योंकि वायुमण्डलीय ताप बढ़ने से हिम समुद्र तल बढ़ जायेगा तथा बाढ़ जैसी
हाइड्रोकार्बन  धातुहाइड्रोकार्बन  धातु
अथवा
ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ के तीन विनाशकारी परिणाम लिखिए। उलोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम
(1) पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर जिसमे पानी में आयेगी।
(2) पृथ्वी के तापमान बढ़ने पर एकत्रित बर्फ पिघलेगी और समुद्र का जड़ेगा जिससे समुद्र तटीय देशों और उसकी अबादी को खतरा होगा।
(d) पेड़ पौधों व जीवों की अकाल मृत्यु हो सकती है। जिससे अधिक वर्षा अथवा सूखा पड़ेगा। 4)तेजी से बढ़ेगा।

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